झारखंड में 8792 युवाओं को नियुक्ति पत्र, सीएम हेमंत सोरेन ने भरी नई ऊर्जा

राँची : सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि युवा राज्य में युवा शक्ति के साथ सरकार हर कदम पर खड़ी है। आज आपके भविष्य के साथ एक नया अध्याय जुड़ रहा है। आप सरकार के अभिन्न अंग के रूप में अब अपनी सेवा देंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि आप राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अपना अहम योगदान देंगे। मौका थारांची के मोरहाबादी में आयोजित भव्य राज्य स्तरीय समारोह का। यह समारोह राज्य सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था। इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन ने 8792 नव नियुक्त अभ्यर्थियों को अपॉइंटमेंट लेटर दिया। उन्होंने कहा कि आज जिन्हें नियुक्ति पत्र मिला है, उससे कम से कम 50 हजार लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है।

मन उत्साहित भी है और उदास भी
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होना सभी के लिए खुशी की बात है, लेकिन मन थोड़ा उदास भी है क्योंकि दिशोम गुरु शिबू सोरेन इस मौके पर मौजूद नहीं हैं। उन्होंने बताया कि अगर वे आज होते तो इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को नियुक्ति मिलते हुए देखकर बहुत प्रसन्न होते। उन्होंने इस मौके पर महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन भी किया।

युवाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर
सीएम ने कहा कि यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र देने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि सिर्फ इस साल सोलह हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी और आठ हजार लोगों को निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। पिछले कुछ वर्षों में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में लगातार बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

 

युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों से कहा कि वे जहां भी पदस्थापित हों, वहां कम से कम एक नौजवान को अपने जैसा आगे बढ़ाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि अगर हर युवा यह जिम्मेदारी निभाए तो झारखंड की तस्वीर बदल सकती है।

भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
सीएम ने कहा कि चुनौतियों के बीच भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से चल रही है। कुछ लोग इसका विरोध करते हैं, लेकिन सरकार अपने काम पर ध्यान दे रही है। लक्ष्य है झारखंड को एक नए आयाम पर ले जाना।

 

हर वर्ग के लिए संवेदनशीलता
उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासी, दलित, पिछड़ा, महिला, युवाओं और दिव्यांगों सहित हर वर्ग के लिए संवेदनशीलता से काम कर रही है। चाहे पढ़ा लिखा व्यक्ति हो या कम पढ़ा लिखा, सरकार सबको उनकी क्षमता के अनुसार अवसर देने की कोशिश कर रही है।

विकास की जिम्मेदारी सबकी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने संघर्ष कर राज्य का निर्माण किया था। ऐसे में किसानों, शिक्षकों, कर्मचारियों, युवाओं और अधिकारियों सभी की जिम्मेदारी है कि वे राज्य को आगे ले जाने में अपनी भूमिका निभाएं। सामूहिक प्रयास से ही झारखंड मजबूत बन सकता है।

 

सरकार की योजनाओं का असर
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सकारात्मक असर साफ दिख रहा है। मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना से महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ी है। एक महिला अभ्यर्थी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उसने इसी योजना की राशि से अपनी पढ़ाई पूरी की और अब पदाधिकारी बनी है। सहायक आचार्य पदों पर चालीस प्रतिशत और जेपीएससी सिविल सेवा में तीस प्रतिशत महिलाओं का चयन होना भी इसी बदलाव का प्रमाण है।

किन पदों पर हुई नियुक्ति
समारोह में कुल 8792 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिले। इनमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से चयनित 197 उप समाहर्ता, 35 डीएसपी, 55 राज्य कर अधिकारी, 2 काराधीक्षक, 8 शिक्षा सेवा श्रेणी 2, 1 जिला समादेष्टा, 8 सहायक निबंधक, 14 श्रम अधीक्षक, 6 प्रोबेशन पदाधिकारी और 3 उत्पाद निरीक्षक शामिल हैं। इसके अलावा 22 दंत चिकित्सक, 150 कीटपालक और 8291 सहायक आचार्य नियुक्त किए गए। कर्तव्य के दौरान शहीद हुए 84 पुलिस कर्मियों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति भी दी गई।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री दीपक बिरुवा, मंत्री चमरा लिंडा, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री हफीजुल हसन, मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री दीपिका पांडेय, मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, राज्य सभा सांसद महुआ माजी, विधायक ममता देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह एवं विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव/ सचिव तथा अन्य वरीय अधिकारी मौजूद थे।

साढ़े तीन माह के छाई ट्रांसपोर्टिंग आंदोलन का परिणाम जीरो रहा-सांसद

बोकारो थर्मल
बोकारो थर्मल एवं चंद्रपुरा पावर प्लांट से छाई उठाव पर रोक को लेकर साढ़े तीन माह के लंबे आंदोलन को लेकर पहली बार सोमवार को बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के निदेशक भवन में गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि साढ़े तीन माह के छाई ट्रांसपोर्टिंग बंद कर चलाये जा रहे आंदोलन का परिणाम जीरो रहा है और इसे सभी लोग जान रहें हैं। सांसद ने कहा कि आंदोलन के कारण डीवीसी के दोनों पावर प्लांटों के ऐश पौंड पूरी तरह से भरे हुए हैं और बोकारो थर्मल के पावर प्लांट को बंद करने की नौबत आ गई थी। कहा कि डीवीसी का पावर प्लांट बंद होता तो झारखंड के कमांड एरिया वाले सात जिलों को घोर बिजली संकट का सामना करना पड़ता। जिससे राज्य की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता। जबकि बिजली वर्तमान में सभी की एक जरुरत बन गई है। सांसद ने कहा कि पावर प्लांट को चलते हुए भी जो मांगे थीं उस पर बात करके निराकरण निकाला जा सकता था। कहा कि विस्थापितों एवं ट्रांसपोर्टरों की जो भी समस्या थी उसे सही प्लेटफॉर्म पर रखने की जरुरत थी तो निराकरण निकाला जा सकता था। कहा कि अभी भी उनको मेरी जरुरत महसूस होती है तो मुझसे मदद ले सकते हैं। सांसद ने कहा कि ई-टेंडर के कारण बाहर की कंपनियां कम रेट में टेंडर डालकर कार्य करने आती हैं। जिसके कारण ऐसी समस्या सामने आ रही है। कहा कि कुछ कानूनी बाध्यता को भी देखने की जरुरत है। सभी के साथ मिलकर बात कर समस्या को सलटाया जा सकता था। बोकारो डीसी की अध्यक्षता में एक बार प्रयास भी किया गया परंतु बैठक नहीं हो सकी। सांसद ने कहा कि कोल इंडिया में कोयला सैंपलिंग के कारण कोयला का उठाव नहीं हो रहा था और यह कोल इंडिया का एक काला कानून था जिसको लेकर कोल इंडिया के चेयरमैन, कोल सचिव एवं मंत्री से दिल्ली एवं कोलकाता में मिलकर सैंपलिंग वाले कानून को वापस करवाने का कार्य किया। जिससे कोयला का कारोबार करने वालों में हर्ष का माहौल व्याप्त है। कहा कि सोमवार को डीवीसी के स्थानीय एचओपी सुशील कुमार अरजरिया से भी मिलकर पिछले दिनों मुख्यालय कोलकाता में संपन्न बैठक एवं बनाये गये मिनट्स को लेकर उसे सतह पर उतारकर कार्य करने की बात की और कहा कि विस्थापितों के साथ बैठक कर उसे लागू करने का काम करें। सांसद ने कहा कि झारखंड राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। कोयला के अवैध कारोबारी पूरे सिस्टम पर हावी हो गये हैं और पूरा सिस्टम इस धंधे में संलिप्त हो गया है। कहा कि मामले को लेकर उनका विरोध जारी है और जिस प्लेटफार्म पर उन्हें आवाज उठानी चाहिए। उठाने का काम कर रहें हैं। सांसद के साथ डीवीसी के एचओपी सुशील कुमार अरजरिया, सासंद प्रतिनिधि दीपक महतो, जितेंद्र यादव सहित अन्य कई लोग थे।

चाईबासा में पुलिस-ग्रामीणों में हिंसक भिड़ंत पुलिस ने किया लाठीचार्ज, आंसू गैस छोड़े…

झारखंड
चाईबासा: चाईबासा में सोमवार देर रात नो-एंट्री के लिए चल रहा आंदोलन हिंसक हो गया। तांबो चौक पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच जबरदस्त झड़प हुई। प्रदर्शनकारी ग्रामीण लंबे समय से एनएच-220 और चाईबासा बाईपास पर दिन के समय भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इन वाहनों की तेज रफ्तार से आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है।

सोमवार को सैकड़ों ग्रामीण परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा के आवास का घेराव करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें तांबो चौक पर ही रोक दिया। इसके बाद भीड़ ने वहीं धरना शुरू कर दिया। सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करने लगी।

शाम तक चला धरना, रात में भड़की हिंसा

ग्रामीणों ने तांबो चौक पर ही शाम तक धरना जारी रखा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने वहीं खाना बनाया, नृत्य-गान किया और प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, भीड़ का जोश और बढ़ता गया। देर रात पुलिस ने जब आंदोलनकारियों को हटाने की कोशिश की, तो स्थिति अचानक बिगड़ गई।

नाराज ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। इस बीच सदर एसडीपीओ की स्कॉर्पियो गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। मौके पर भगदड़ मच गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी फैल गई। हालांकि किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन कई लोगों को हल्की चोटें आईं।

स्थिति नियंत्रण में आया पर तनाव बरकरार

झड़प के कारण कुछ घंटों तक मुख्य मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। देर रात पुलिस ने हालात पर काबू पाया और सड़क खाली कराई। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है, लेकिन किसी अप्रिय घटना से बचाव के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

उधर, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक दिन के समय भारी वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सड़क सुरक्षा और आम लोगों की जान बचाने के लिए है।

बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे ‘मोंथा’ चक्रवात को लेकर सतर्कता को लेकर दिशा निर्देश जारी…

धनबाद :बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहा ‘मोंथा’ चक्रवात एक ट्रॉपिकल तूफान के रूप में तेजी से सक्रिय हो रहा है और मौसम विभाग द्वारा यह अनुमान व्यक्त किया गया है कि आने वाले दिनों में यह एक गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके प्रभाव से झारखंड के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में तेज हवाएँ, भारी वर्षा तथा वज्रपात की संभावना जताई गई है।

इस परिप्रेक्ष्य में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री आदित्य रंजन ने तत्काल निम्नलिखित कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए:

आपदा प्रबंधन पदाधिकारी को एनडीआरएफ/एसडीआरएफ टीमों को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में तैयार स्थिति में रखने हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
निचले व जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहाँ के लोगों को सुरक्षित स्थलों पर स्थानांतरित करने की योजना बनाने हेतु नगर आयुक्त, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी तथा चिरकुंडा नगर परिषद को निर्देश दिए गए। इसके साथ ही जिला के सभी विभागों को किसी भी आपातकाल परिस्थिति से निपटने के लिए समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक आकस्मिक सेवाओं हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
संचार व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त एवं सक्रिय रखने हेतु संबंधित विभागों के पदाधिकारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।
सभी बीडीओ, अंचलाधिकारी एवं थाना प्रभारियों को चौबीसों घंटे निगरानी और रेस्पॉन्स के लिए निर्देशित किए गए।
उपायुक्त ने जिला जनसंपर्क पदाधिकारी को निर्देशित किया की जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सतर्क करें कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।